ख़ास रिपोर्ट

BHU: सिर्फ सुरक्षा ही नहीं इन बंदिशों से आजादी के लिए बेटियां खा रही लाठियां

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1038
| सितंबर 25 , 2017 , 14:37 IST

बीएचयू आंदोलन सिर्फ लड़कियों की सुरक्षा को लेकर नहीं है। यह आंदोलन लड़कियों की आजादी का है। यह लड़ाई गैरबराबरी के खिलाफ एक मुखर विरोध भी है।  महज यौन हिंसा से सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की मांग करने के लिए बीएचयू की इन बहादुर लड़कियों पर लाठियां नहीं बरसाई गईं। इसलिए बरसाई गईं कि वे किसी भी तरह की कोई मांग क्यों कर रही हैं! मांग करने का मतलब है कि वे बिगड़ गई हैं, और आगे और भी कुछ मांग सकती हैं।

Bhu 8

बीएचयू में लड़कियों के अलग कानून

लड़कियों के हॉस्टल में माँसाहारी भोजन नहीं दिया जाता, जबकि लड़कों को दिया जाता है

लड़कियां रात दस बजे के बाद मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं कर सकतीं

रात दस बजे के बाद पढ़ाई भी नहीं कर सकतीं

रात दस बजे के बाद 24/7 डिज़िटल लाइब्रेरी का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं

जबकि लड़के यह सब कर सकते हैं

लड़कियां यूनिवर्सिटी बस सर्विस का इस्तेमाल भी नहीं कर सकतीं

शाम आठ बजे के बाद कैम्पस के बाहर नहीं रह सकतीं

लड़कियों को लिख कर यह शपथ पत्र देना होता है कि वे कैंपस में किसी भी आंदोलन, धरने-प्रदर्शन या विरोध सभा में भाग नहीं लेंगी

लड़कियों को बार बार समझाया गया है कि वे जींस टॉप न पहनें और लड़कों से न मिले-जुलें

Bhu 2

बीएचयू के आदर्श और कानून से दम घुटता था लड़कियों का

बीएचयू के हॉस्टल में लड़कियों पर लगाई गई पाबंदी और बंदिशे से उनका दम घुटने लगा था। इन दमघोटू माहौल से निकलने के लिए लड़कियों ने अपने शपथ पत्र का उल्लंघन कर दिया है। ड्रेस कोड का परित्याग किया है। भारतीय हिन्दू नारी के आदर्श की धज्जियां उड़ा दी हैं।

यौन हिंसा, अपमान और भेदभाव चुपचाप सह लो। बोलो मत। मुंह मत खोलो। ज़िन्दगी वो सब कुछ सहते हुए बिता दो, जिसे इंसान सहन नहीं कर सकता।यही तो हैं हमारा आदर्श। मुंह खोलोगी तो इंसान बन जाओगी, गौरी लंकेश बनने लगोगी, हमारी संस्कृति का सामान नहीं रह जाओगी।

हम ऐसा नहीं होने देंगे। लाठी चलानी पड़े या गोली।

 


कमेंट करें