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सु्प्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अडल्टरी अब अपराध नहीं, महिला की गरिमा सर्वोपरि

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 27 , 2018 , 11:03 IST

157 साल पुराने कानून IPC 497 (व्याभिचार) की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला आया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर ने आईपीसी के सेक्शन 497 को अपराध के दायरे से बाहर करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस और जस्टिस खानविलकर ने अपने फैसले में कहा कि अडल्टरी तलाक का आधार हो सकता है लेकिन यह अपराध नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था। पीठ तय करेगी कि यह धारा अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं।

 

इस धारा का विरोध करते हुए एक याचिका दायर की गई है। इस धारा के तहत एडल्टरी मामले में पुरुष के दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है लेकिन इसमें महिलाओं को सजा देने का प्रावधान नहीं है। इस सिलसिले में एक याचिका दायर कर फेर बदल करने की मांग की है।

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व्यभिचार को लेकर भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा अगर अविवाहित पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ सैक्स करता है तो वह व्यभिचार नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि शादी की पवित्रता बनाए रखने के लिए पति और पत्नी दोनों की जिम्मेदारी होती है। कोर्ट ने कहा विवाहित महिला अगर किसी विवाहित पुरुष से संबंध बनाती है तो सिर्फ पुरुष ही दोषी क्यों? जबकि महिला भी अपराध की जिम्मेदार है।

किसने दाखिल की याचिका

केरल निवासी जोसफ शिन ने आईपीसी की धारा 497 के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर इसे निरस्त करने की गुहार लगाई है। साथ ही याचिका में इस प्रावधान को भेदभावपूर्ण और लिंग विभेद वाला बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि धारा 497 के तहत व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में तो रखा गया है लेकिन ये अपराध महज पुरुषों तक ही सिमत है। इस मामले में पत्नि को अपराधी नहीं माना गया है।

क्या है धारा 497

आईपीसी की धारा 497 के तहत अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी शादीशुदा महिला के साथ रजामंदी से संबंध बनाता है तो उस महिला का पति एडल्टरी के नाम पर इस पुरुष के खिलाफ केस दर्ज कर सकता है लेकिन वो अपनी पत्नी के खिलाफ किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। साथ ही इस मामले में शामिल पुरुष की पत्नी भी महिला के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं करवा सकती है। इसमें ये भी प्रावधान है कि विवाहेतर संबंध में शामिल पुरुष के खिलाफ केवल उसकी साथी महिला का पति ही शिकायत दर्ज कर कार्रवाई करा सकता है।

पुरुष को कितनी सजा का प्रावधान

अगर किसी पुरुष पर अवैध संबंध का आरोप साबित हो जाता है तो इसे अधिकतम सजा पांच साल की होती है। इस तरह के मामले की शिकायत किसी पुलिस स्टेशन में नही हो सकते बल्कि मजिस्ट्रेट के सामने की जाती है और सारे सबूत पेश करने होते है। सबूत पेश होने के बाद संबंधित व्यक्ति को समन भेजा जाता है।

 


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