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जानिए आखिर क्यों जैश सरगना मसूद अज़हर को बार-बार बचा रहा चीन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मार्च 15 , 2019 , 12:54 IST

जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर एक बार फिर चीन ने रोड़ा अटका दिया। चीन एक बार फिर इस मामले में रोड़ा बन गया है। चीन ने अपना असली रंग दिखाते हुए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को वैश्विक आतंकी घोषित करने में बाधा डाल दिया है। हालांकि चीन ने ऐसा पहली बार नही किया है इससे पहले 2017 में भी चीन ने अड़ंगा लगाया था। चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया। इसके साथ ही ये प्रस्ताव रद्द हो गया है। चीन की इस हरकत के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि जब तक आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान कार्रवाई नहीं करता है, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी।

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भारत ने 2016 में पठानकोट हमले के बाद मसूद अजहर को बैन करने की कोशिश की थी लेकिन चीन ने तकनीकी आधार का हवाला देकर इसे लटकाए रखा। इस बार भी चीन ने वही किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर चीन ने चौथी बार अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किया है।

इसमें कोई शक नहीं है कि चीन के लिए पाकिस्तान ही प्राथमिकता पर है और उसका सदाबहार दोस्त भी। मसूद अजहर पाकिस्तान से आतंकी संगठन की गतिविधियों को अंजाम देता है। अगर अजहर वैश्विक आतंकी घोषित हो जाता तो पाकिस्तान को उसकी सारी संपत्ति जब्त करनी पड़ती और उसकी आवाजाही पर बैन लगाना पड़ता। चीन पाकिस्तान को खुश करने की हर कोशिश करता रहता है लेकिन इसके अलावा मसूद अजहर को बैन ना करने के पीछे चीन का एक अलग डर भी है।

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दरअसल, चीन दक्षिण एशिया में अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान का बचाव करने से ज्यादा अपने आर्थिक हितों को साधने में लगा हुआ है। चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन की महत्वाकांक्षी योजना बेल्ट ऐंड रोड (BRI) का अहम हिस्सा है। BRI के तहत चीन सड़क, रेल और समुद्रीय मार्ग से एशिया, यूरोप और अफ्रीका में अपनी पहुंच बनाएगा।

चीन को डर है कि जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ किसी भी फैसले से उसका बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रभावित हो सकता है। चीन का CPEC प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है जो जैश-ए-मोहम्मद का निशाना बन सकता है।

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सीपीईसी ना केवल पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलिगिट-बालटिस्तान से होकर गुजरता है बल्कि खैबर पख्तूनख्वा के मनसेरा जिले में भी फैला है। खैबर पख्तूनख्वा में ही बालाकोट स्थित है जहां पर कई आतंकी कैंप स्थित हैं। भारतीय वायु सेना ने पुलवामा हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े कैंप को तबाह कर दिया था।

चीन ने सीपीईसी के करीब 45 परियोजनाओं में करीब 40 अरब डॉलर का निवेश किया है जिसमें से आधे प्रोजेक्ट पूरे होने को हैं। चीन किसी भी सूरत में अपने भारी-भरकम आर्थिक और समय के निवेश की सुरक्षा चाहता है।

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बता दें कि चीन ने हाल ही में बालाकोट के नजदीक सीपीईसी के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया था। इसके अलावा, पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला कराकोरम हाईवे भी मनसेरा से ही होकर गुजरता है।

पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्तों की वजह से जैश जैसे आतंकी संगठनों से सीपीईसी परियोजना और उसमें काम कर रहे हजारों चीनी नागरिकों को सुरक्षा मिल जाती है।इसी कारण से चीन जैश सरगना मसूद अजहर को बचाने की कोशिस कर रहा है।

बता दें अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से 27 फरवरी को रखा गया था। 2017 में भी चीन ने अड़ंगा लगाकर जैश सरगना मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा लिया था। उस वक्त चीन ने मसूद के पक्ष में तर्क दिया था कि वह बहुत बीमार है और अब ऐक्टिव नहीं है और न ही वह जैश का सरगना है।

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