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चंद्रमा की धूल को लेकर NASA पर हुआ मुकदमा, नील आर्मस्ट्रांग ने महिला को दिया था गिफ्ट

शुभा सचान , न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जून 13 , 2018 , 16:00 IST

अमेरिका के Cincnnnati की रहने वाली लौरा सिको नाम की एक महिला ने नासा पर मुकदमा किया है। दरअसल, सन् 1970 में लौरा सिको जब 10 साल की थी तब  नील आर्मस्ट्रांग ने कथित रूप से चंद्रमा की धूल भरी छोटी सी बॉटल उन्हें उपहार में दी थी। लैरा के मुताबिक यह चंद्रमा से लायी गई धूल है। 

इसके साथ ही एक हस्तलिखित नोट था जिसमें लिखा था

"लैरा एन मुरे – बेस्ट ऑफ लक - नील आर्मस्ट्रांग अपोलो 11"

चूंकि चंद्रमा से लाया गया कोई भी सामान धरती के लोगों के लिए किसी दुर्लभ वस्तु से कम नहीं है। और ऐसी किसी वस्तु पर सिर्फ नासा या अमेरिकी सरकार का ही अधिकार हो सकता है। इस डर से कि नासा भविष्य में मून डस्ट की उस बॉटल पर अपना दावा ना कर सके, इसलिए महिला ने इस हफ्ते इस मामले को लेकर फेडरल कोर्ट में केस कर दिया, हालांकि अभी तक नासा ने ना तो बॉटल वापस लेने की कोई कोशिश की, और ना ही उनकी तरफ से ऐसा कोई बयान सामने आया है।

लैरा सिको ने दशकों तक यह शीशी नहीं देखी, हालांकि उसने अपने शयनकक्ष में ऑटोग्राफ रखा था। पांच साल पहले जब उसके माता-पिता की मौत हुई। सालों बाद लैरा को अपने पेरेंट्स के सामान में से वो बॉटल वापस मिली है। अब लैरा सिको उस पर अपना हक जताना चाहती है, वे नहीं चाहती कि NASA उनसे वो बॉटल वापस ले।

आर्मस्ट्रांग कथित तौर पर सिको के पिता टॉम मुरे के दोस्त थे, जो कि US आर्मी में थे।

सिको को उपहार स्वरूप मिले उस मून डस्ट का परीक्षण कम से कम दो बार किया गया है, वैज्ञानिकों का मानना है कि यह धूल चंद्र सतह का नमूना है। 

अब देखना ये है कि नासा की तरफ से इस पूरे मामले में क्या फैसला आता है।

कौन थे नील आर्मस्ट्रांग

चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति नील एल्डन आर्मस्ट्रांग थे। खगोलयात्री यानी ऍस्ट्रोनॉट बनने से पूर्व वे नौसेना में थे। वे एक एयरोस्पेस इंजीनियर, नौसेना अधिकारी, परीक्षण पायलट, और प्रोफ़ेसर भी थे।नौसेना में रहते हुए उन्होंने कोरिया युद्ध में भी हिस्सा लिया। नौसेना के बाद उन्होंने पुरुडु विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि ली और तत्पश्चात् एक ड्राइडेन फ्लाईट रिसर्च सेंटर से जुड़े और एक परीक्षण पायलट के रूप में 900 से अधिक उड़ानें भरीं। यहाँ सेवायें देने के बाद उन्होंने दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से परास्नातक की उपाधि हासिल की।

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आर्मस्ट्रांग को मुख्यतः अपोलो अभियान के खगोलयात्री के रूप में चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। इससे पहले वे जेमिनी अभियान के दौरान भी अंतरिक्ष यात्रा कर चुके थे। अपोलो 19 वह अभियान था जिसमें जुलाई 1969 में पहली बार चंद्रमा पर मानव सहित कोई यान उतरा और आर्मस्ट्रांग इसके कमांडर थे। उनके अलावा इसमें बज़ एल्ड्रिन, जो चाँद पर उतरने वाले दूसरे व्यक्ति बने, और माइकल कॉलिंस जो चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाते मुख्य यान में ही बैठे रहे, शामिल थे।

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अपने साथियों के साथ, इस उपलब्धि के लिये आर्मस्ट्रांग को राष्ट्रपति निक्सन के हाथों प्रेसिडेंसियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने उन्हें 1978 में कॉंग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर प्रदान किया और आर्मस्ट्रांग और उनके साथियों को वर्ष 2009 में कॉंग्रेसनल गोल्ड मेडल दिया गया।

आर्मस्ट्रांग की मृत्यु, सिनसिनाती, ओहायो, में 25 अगस्त 2012 को 82 वर्ष की उम्र में बाईपास सर्जरी के पश्चात् हुई।


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