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SC ने महिलाओं को दिया गर्भपात का अधिकार, कहा- पति की सहमति जरूरी नहीं

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| अक्टूबर 28 , 2017 , 10:49 IST

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसला सुनाते हुए महिलाओं को गर्भपात के संबंध में बड़ा अधिकार दे दिया है। कोर्ट ने कहा है कि गर्भपात कराना या नहीं कराना ये पूरी तरह से महिला की इच्छा पर निर्भर है। कोर्ट ने ये फैसला अपनी पत्नी से अलग रह रहे एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया है।

कोर्ट में दाखिल याचिका में महिला को गर्भपात कराने से पहले अपने पति की इजाजत लेने की मांग की गई थी। हरियाणा और पंजाब हाई कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद पति अपनी अर्जी को लेकर सुप्रीम कोर्ट गया था।

दरअसल, पति ने अपनी याचिका में कहा था कि उसकी पत्नी ने अपने माता-पिता, भाई और 2 डॉक्टरों की सलाह पर अवैध गर्भपात कराया। जिस पर पत्नी ने आपत्ति जातते हुए कहा कि, इतने महत्वपूर्ण फैसले में पत्नी ने उसकी राय नहीं ली। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला के हक में फैसला दिया है।

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गौरतलब है कि, ये मामला 1995 में विवाहित दम्पति का है, जो आपसी मनमुटाव के कारण अलग रह रहे थे। पत्नी अपने बेटे के साथ चंडीगढ़ में अपने मायके में 1999 से रह रही थी। लेकिन सुलह हो जाने पर नवंबर 2002 से दोनों ने एक-साथ रहना शुरू कर दिया। लेकिन 2003 में फिर दोनों के बीच तनाव हुआ और तलाक हो गया, लेकिन इस दौरान महिला गर्भवती हो गई।

पति से अलग होने के कराण महिला गर्भपात कराना चाहती थी, लेकिन इसपर पति को आपत्ति थी। जिसके बाद महिला ने अपने परिवार से संपर्क किया, जिसके बाद माता-पिता महिला को लेकर चंडीगढ़ के अस्पताल ले गए यहां पति ने अस्पताल के दस्तावेज में गर्भपात की इजाजत मांगी गई थी पर पति ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद पति ने पत्नी पर 30 लाख रुपये के मुआवजे का केस ठोक दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि विवाद के बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध की इजाजत है लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि महिला गर्भ धारण करने के लिए भी राजी हुई है, ये पूरी तरह से महिला पर निर्भर है कि वह बच्चे को जन्म देना चाहती है या नहीं।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं

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