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बेहद दिलचस्प है चॉकलेट की कहानी, जानिए कहां बनी दुनिया की पहली Chocolate

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 7 , 2018 , 13:16 IST

चॉकलेट!! जिसका नाम सुनते ही मुँह में पानी आ जाए और हो भी क्यों ना चॉकलेट चीज़ ही ऐसी है। चाहे फिर बात बच्चे की हो या बड़े की,ये हर किसी से अपना एक खास रिश्ता जोड़ लेती है। वो है चॉकलेटी रिश्ता। फिर बात मस्ती की हो या प्यार की,मूड अच्छा करने की हो या किसी को गिफ्ट देकर खुश करने की, तो सबसे अच्छा ऑपशन है- चॉकलेट। शनिवार को पूरी दुनिया में वर्ल्ड चॉकलेट डे मनाया जा रहा है। जो विश्वभर में 7 जुलाई को मनाया जाता है। इसका क्रेज सबसे ज्यादा युवाओं में देखने को मिलता है।

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चॉकलेट डे विश्वभर में सबसे पहले 7 जुलाई 1550 को यूरोप में सेलीब्रेट किया गया था। इसके बाद 1995 में ये फ्रांस में मनाया गया था। ये दिन पश्चिमी संस्कृति का उत्सव है जो की अब बड़ी संख्या में विश्वभर में सेलीब्रेट किया जाता है। चॉकलेट डे का अपना ही एक अहम मकसद है, ये अपनापन और प्यार जताने का एक अलग ही अंदाज़ है। वर्ल्ड चॉकलेट डे पर लोग अपने खास दोस्तों और रिश्तदारों को चॉकलेट देकर अपनी खुशियों का इजहार करतें हैं। इसकी डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

आजकल मार्केट में अलग-अलग वेरायटी की चॉकलेट्स मौजूद हैं। फिर चाहे वो कोई भी ब्रांड हो, आजकल हर बच्चे की ज़ुबान पर चॉकलेट के ब्रांड्स का नाम रटा हुआ है। मार्केट में हर रेंज का चॉकलेट मौजूद है। चॉकलेट का महत्व सिर्फ गिफ्ट करनें में ही नहीं है बल्कि इसको सेहत के लिए भी लाभदायक माना जाता है। ज़रा देखिए यामी गौतम कैसे कर रहीं है चॉकलेट डे को एंजोए। 

 

आइए, जानतें हैं इन खास चॉकलेट्स के बारें में :

डार्क चॉकलेट -

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 डार्क चॉकलेट की सबसे बड़ी खासियत ये है कि वो सेहत के लिए काफी अच्छी मानी जाती है। इसका सेवन करने से शारिरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है।

मिल्क चॉकलेट -

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मिल्क चॉकलेट का क्रेज़ बच्चों में ज्याद रहता है। ये बच्चों के लिए ज्यादा उपयोगी भी मानी जाती है। इसको खाने से दिमाग तेज़ होता है। साथ ही हृदय संबंधी बिमारियों का खतरा भी कम रहता है।

वाईट चॉकलेट -

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वाईट चॉकलेट अपने नाम से ही अपना महत्व बता देती है। इसका उपयोग करने से शरीर में केल्शियम की कमी नहीं होती और साथ ही हड्डियों में चल रही कमजोरी को भी दूर करता है।

फ्रूट एन नट चॉकलेट -

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फ्रूट एन नट चॉकलेट में कई प्रकार के नट्स का प्रयोग होता है। इसमें सूखे मेवों का उपयोग होता है जो खानें में टेस्ट के साथ-साथ शरीर के लिए भी अच्छी होता है। इसका डिमांड मार्केट में कई ज्यादा है।

यहां देखें चॉकलेट की कहानी - 

चॉकलेट' इस शब्‍द के बारे में बहुत से तथ्‍य हैं। कुछ के अनुसार यह शब्‍द मूलत: स्‍पैनि‍श भाषा का शब्‍द है। ज्‍यादातर तथ्‍य बताते हैं कि चॉकलेट शब्‍द माया और एजटेक सभ्‍यताओं की पैदाइश है जो मध्‍य अमेरि‍का से संबंध रखती हैं। एजटेक की भाषा नेहुटल में चॉकलेट शब्‍द का अर्थ होता है खट्टा या कड़वा.

चाँकलेट की प्रमुख सामग्री केको या कोको के पेड़ की खोज 2000 वर्ष पूर्व अमेरि‍का के वर्षा वनों में की गई थी। इस पेड़ की फलि‍यों में जो बीज होते हैं उनसे चॉकलेट बनाई जाते है। सबसे पहले चॉकलेट बनाने वाले लॉग मैक्‍सि‍को और मध्‍य अमेरि‍का के थे।

1528 में स्‍पेन ने जब मैक्‍सि‍को पर कब्‍जा कि‍या तो वहाँ का राजा भारी मात्रा में कोको के बीजों और चॉकलेट बनाने के यंत्रों को अपने साथ स्‍पेन ले गया। जल्‍दी ही स्‍पेन में चॉकलेट रईसों का फैशनेबल ड्रिंक बन गया।

इटली के एक यात्री फ्रेंसि‍स्‍को कारलेटी ने सबसे पहले चॉकलेट पर स्‍पेन के एकाधि‍कार को खत्‍म कि‍या. उसने मध्‍य अमेरि‍का के इंडि‍यंस को चॉकलेट बनाते देखा और अपने देश इटली में भी चॉकलेट का प्रचार प्रसार कि‍या. 1606 तक इटली में भी चॉकलेट प्रसि‍द्ध हो गई।

फ्रांस ने 1615 में ड्रिंकिंग चॉकलेट का स्‍वाद चखा. फ्रांस के लोगों को यह स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि बहुत लाभदायक पदार्थ लगा। इंग्‍लैंड में चॉकलेट की आमद 1650 में हुई।

अभी तक लोग चॉकलेट को पीते थे। एक अंग्रेज डॉक्‍टर सर हैंस स्‍लोने ने दक्षि‍ण अमेरि‍का का दौरा कि‍या और खाने वाली चॉकलेट की रेसि‍पी तैयार की। सोचि‍ए एक डॉक्‍टर और चॉकलेट की रेसि‍पी. कैडबरी मि‍ल्‍क चॉकलेट की रेसि‍पी इन्‍हीं डॉक्‍टर ने बनाई.

आपको जानकार आश्चर्य होगा की पहले चॉकलेट तीखी हुआ करती थी और पी जाती थी। अमरि‍का के लोग कोको बीजों को पीसकर उसमें वि‍भि‍न्‍न प्रकार के मसाले जैसे चि‍ली वॉटर, वनीला, आदि डालकर एक स्‍पाइसी और झागदार तीखा पेय पदार्थ बनाते थे।

चॉकलेट को मीठा बनाने का श्रेय यूरोप को जाता है जि‍सने चॉकलेट से मि‍र्च हटाकर दूध और शक्‍कर डाली. चॉकलेट को पीने की चीज से खाने की चीज भी यूरोप ने ही बनाया.


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